Love Shayri

मोहब्बत करने वालों को दिखावे की जरूरत नही पड़ती

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मोहब्बत करने वालों को दिखावे की जरूरत नही पड़ती
सच्चायी आँखों में दिखती है बताने की जरूरत नही पड़ती

ठहाके तो लगाते हैं ज़ोर से पर दिल से वोह मुस्कराते नही
खाली नज़रों से कभी वफ़ा-ए-इश्क की उम्मीद लगाते नही

वोह गले तो मिलते हैं रोज़ हमसे जाने क्यों दिल मिलाते नही
ऐसे बगीचों में गुलशन-ए-मोहब्बत कभी अपना खिलाते नही

बातों में दिखता तो है पर उनकी छुअन में महसूस होता नही
कागजी गुलाब कभी मेरी रुहानी रूह को महका सकते नही

यूँ तो होता है हर शख्स अजनबी अपनी पहली मुलाकात में
वोह था अपना फिर क्यों हुआ अजनबी आखिरी मुलाकात में

नकाब जिसके भी चेहरे से उठाया थोड़ा वोह अजनबी दिखा
वोह जो था मेरा रहबर जानवरों की फितरत से बदतर दिखा

दूर रह कर ना मिलना फिर भी कुछ तो समझ आता था मुझे
इतने पास रह कर दूरियों का यह समुंदर ना समझ आया मुझे

रिश्तों को तोड़ रिश्ते ढूंढ़ने निकला है वोह अब बाज़ार मे
हीरे गँवा कर कोयले कमाने निकला है वोह अब बाज़ार में

यूँ तो इंसानो की भीड़ से भरी दिखती है हर तरफ़ यह दुनिया
एक आदमी की तलाश में फिर क्यों गुजर गई मेरी यह दुनिया

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