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उठ गया राज पर से पर्दा, तो इस वजह से धौनी ने छोड़ी वनडे और टी-20 की कप्तानी

23 दिसंबर, 2004 को चटगांव में कंधे तक लटकते लंबे-लंबे बाल और उसके ऊपर कैप लगाए एक 23 साल के लड़के को देखकर क्रिकेट जगत चौंक गया। झारखंड के मैदानों में लंबे-लंबे छक्के लगाने वाला यह विकेटकीपर अपने लंबे बालों के कारण आकर्षण का केंद्र था, लेकिन सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरा यह बल्लेबाज बिना रन बनाए ही आउट हो गया। इसके बाद अगले तीन मैचों में भी उन्होंने 12, नाबाद सात और 03 रनों की पारियां खेलीं। इसके बाद विशाखापत्तनम में पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में उस खिलाड़ी ने 123 गेंदों में 148 रनों की पारी खेलकर बता दिया कि उसका नाम महेंद्र सिंह धौनी है और वह भारत का भविष्य है।

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अगर सौरव गांगुली ने कप्तान के तौर पर टीम को लड़ना सिखाया तो धौनी ने जीतना। यही कारण रहा कि माही भारतीय टीम के सबसे सफल कप्तान बने। उनके नेतृत्व में टीम ने हर आइसीसी ट्रॉफी जीती। उनकी कप्तानी ने 2007 में पहले टी-20 विश्व कप जीता। उनका फैसला चौंकाने वाला होता था, लेकिन इसका फायदा हमेशा ही भारतीय टीम को मिलता था। सच किया सचिन का सपना इसके बाद उनकी ही कप्तानी में 2011 में अपने ही देश में टीम इंडिया ने वनडे विश्व कप जीता। इसी के साथ विश्व कप विजेता टीम का सदस्य होने का सचिन तेंदुलकर का सपना पूरा हो गया। भले ही मुंबई में उस दिन टीम सचिन को कंधे में लेकर पूरे मैदान का चक्कर लगा रही थी, पर उस जीत की रूपरेखा लिखने वाले धौनी ही थे। 2013 में भारत ने आइसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती। 2019 विश्व कप पर नजर हालांकि पिछले कुछ महीनों से उनकी कप्तानी की धार मंद और बल्लेबाजी की चाल कमजोर नजर आ रही थी। वह 2019 विश्व कप तक अपना करियर बचाए रखना चाहते हैं और यही कारण है कि उन्होंने कप्तान के तौर पर खुद को पीछे धकेल कर खिलाड़ी के तौर पर आगे कर दिया है।

धौनी को पता है कि एक खिलाड़ी के तौर पर उन्हें सिर्फ अपने प्रदर्शन पर ही ध्यान देना होगा। वह एक क्रिकेटर के तौर पर दो साल और क्रिकेट खेल सकते हैं, क्योंकि वह शारीरिक तौर पर पूरी तरह से फिट हैं। इसके लिए टी-20 विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ उनके द्वारा किया गया रन आउट ही काफी है। यही नहीं पिछली सीरीज में भी उन्होंने जिस तरह टेस्ट कप्तान विराट कोहली के साथ रनिंग की थी वह भी बताता है कि वह एक बल्लेबाज-विकेटकीपर के तौर पर पूरी तरह से फिट हैं।

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धौनी के इस कप्तानी छोड़ने के पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि वो अब कप्तानी के दबाव से बाहर निकलकर अब फिर से एक खिलाड़ी के तौर पर क्रिकेट को इंजॉय करना चाहते हैं। हालांकि इस वजह से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि पिछले कुछ महीनों से उनकी कप्तानी की धार मंद और बल्लेबाजी की चाल कमजोर नजर आ रही थी। लेकिन अब देखना दिलचस्प होगा कि जब कप्तानी के दबाव को उतारकर माही मैदान पर उतरेंगे तो उनका बल्ला किस तरह का रुप दिखाएगा।

 

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