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दर्द-ए-दिल के फूल, नसीब वालों के सीने में खिल्ते हैं

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Writer : BM
नामुराद दर्द …
दर्द-ए-दिल के फूल, नसीब वालों के सीने में खिल्ते हैं
जाने कौनसे जन्म में, किन जन्मो के यहाँ हिसाब मिलते हैं

ख़ुद को छुपा खुदी में, नकली चेहरा लिए रोज़ निकलता हूँ
घुटती साँसें स्याह रातें ,जाने कैसे हंस कर सबसे मिलता हूँ

पराए थे कभी, लूटा दौलत-ए-वफ़ा फिर वोह पराए हो गए
लाख समझाया, दिल मानता ही नही वोह अब पराए हो गए

बेखुदी में हो गुम, नशा-ए-ज़िन्दगी में दिन रात चूर रहता हूँ
उस बेवफ़ा को आज भी, अपनी नजरों का मैं नूर कहता हूँ

साथ निभाना कोई इनसे सीखे,यह उमरों का साथ निभाते हैं
जिस्म नही रूह में बस कर, यह जन्मो का साथ निभाते है

रंग प्यार के सब हैं कच्चे, आज नही तो कल ढल ही जाते हैं
रंग इन दर्दों के हैं इतने सच्चे, साल दर साल गहराते जाते है

अपाने पराए सब छोड़ जाए, पर यह अंत तक साथ निभाते हैं
रूह में बसेरा है इनका, हो भस्म जिस्म पर यह ना मिट पाते है

खुशियों का इनसे नाता नही, पर ज़िन्दगी की यही पहचान बने
यूई इन नामुराद दर्दों की, ना कभी इस जमाने में कोई काट बने
……BM

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