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Love Shayri

मेरे ही हाथों में था खंजर, जिसने किया घायल मुझको

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मेरे ही हाथों में था खंजर, जिसने किया घायल मुझको
अपनों के दिए जख्मों से, बच पाना आसान नही होता

जान लेकर ही रहते हैं, दिल के जख्मों के इलाज नही होते
अन्दर ही अन्दर रिसते लहू से, बच पाना आसान नही होता

शिकवे शिकायतों के बोझ में, डूब चुकी हो हर पल ज़िन्दगी
घुटती इन फिज़ाओ में, खुल के साँस लेना आसान नही होता

जिस्म से उतर रिश्तों की रूह में, जा बसी हो आपसी रंजिशे
आहें भरते सीने से, खुशी की दुआ कमाना आसान नही होता

खुली आँखों ने स्जाये हो जो अरमान-ए-दिल के सुनहरे ख्वाब
हकीकी ख्वाबों को, एक पल भी भुला पाना आसान नही होता

चाहा हो जिसको जिंदगी भर, इस जिंदगी से कहीं बढ़कर
बेवफ़ा निकले भी तो क्या, उसको भुलाना आसान नही होता

जानता हूँ मैं, के इस ज़िन्दगी की तो फितरत ही है बेवफाई
फिर भी इसके इश्क में डूब, इसे छोड़ पाना आसान नही होता

वोह रिश्ता-ए-दिल, जो ख्याल से आवाज़ ना बन पाया कभी
उसे ज़िन्दगी भर, आँखों में सजा कर रखना आसान नही होता

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