Najdikiyan
Love Shayri

नजदीकियां दिलों की यह जो बड़ रही हैं तुझमें मुझमें

नजदीकियां

तुझमें मुझमें …
नजदीकियां दिलों की यह जो बड़ रही हैं तुझमें मुझमें
नशा यह ख़ुद से बेखुदी का अब रम रहा है तुझमें मुझमें
बेतकल्लुफ से अरमान अब मचल रहे है तुझमें मुझमें
बेबाक सी रूमानी बातें होने लगी हैं अब तुझमें मुझमें
रेशमी सी उलझने अब उलझ सुलझ रही हैं तुझमें मुझमें
कारवां यादों का खिला बन मिलन की बेला तुझमें मुझमें
मीलों दूर के फास्ले सिमट गए हैं मिल अब तुझमें मुझमें
इश्क जी रहा है यह जिंदगी-ए-मोहब्बत सज तुझमें मुझमें
अलग थे कभी वजूद अब हैं जिंदा एक हो कर तुझमें मुझमें
वफाएँ देख रही हैं अबके यह अक्स अपना तुझमें मुझमें
निखर रही है चाहतें अबके सावन सँवर कर तुझमें मुझमें

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