Love Shayri

वक़्त है बेरहम इसने ना कभी वफ़ा करी है

वोह नज़र …
वक़्त है बेरहम इसने ना कभी वफ़ा करी है
हर वफ़ा के बदले इसने तो बस जफ़ा करी है

उम्मीद में कल की आज भी दिन निकल गया
मिलने की तुमसे मेरी उम्मीद फिर निगल गया

शिकायतों में ही गुजर जाएगी क्या उमर सारी
प्यार करने को भी बचा के रख लो कुछ खुमारी

दीवाने हैं हम आपकी रुहानी रूह के इस कदर
मुन्तज़र है बस पाने को आपकी एक वोह नज़र

पाकर जिसको प्यार हमारा फिर खिल जाएगा
दिल में दबा इश्क जमाने को फिर नजर आयेगा

मोहब्बत को जो मंजूरी तेरी नज़रो की मिल जाएगी
रहमत-ए-खुदा हमारे बिखरते घर पर बरस जाएगी

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