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इंसानों के साथ होता था जानवरों से भी बुरा बर्ताव, देखें सजा देने के क्रूर तरीके

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क्या आपको पता है, एक समय था जब इंसानो के साथ जानवरों से भी बुरा व्यवहार किया जाता था। अब आप सोच रहे होंगे की ऐसा क्या होता होगा, तो चलिए हम आज आपको बताते हैं।

हम बात कर रहे हैं 5 से 15 शताब्दी के दौर की जिसको आज भी लोग याद करके डर जाते हैं।

शरीर के कर दिये जाते थे 2 हिस्से।

क्या आपने ऐसी सजा कर बारे में सुना है जिसमे किसी आदमी के शरीर को बीच में से आधा कर दिया जाता हो। अगर नहीं तो आज हम आपको बता रहे हैं। मध्यकाल में किसी व्यक्ति को टॉर्चर करने के लिए अपराधी के दोनों पैरों को बांधकर उल्टा लटका दिया जाता था। ऐसा करने से अपराधी के शरीर का सारा खून सर में उतर जाता था। उसके बाद अपराधी के बीच में से 2 हिस्से कर दिए जाते थे।

कील वाली कुर्सी।

Chair

यूरोप में टॉर्चर करने के लिए अपराधी को एक किलों वाली कुर्सी पर बैठाकर कुर्सी के निचे से आग लगा दी जाती थी। इस किलों वाली कुर्सी के हर एक हिसे में कीलें लगी हुआ करती थी। इस तरीके को 1800 तक ही इस्तेमाल किया गया।

लोहे की किलों वाली जेल।

Keel

क़ैदियों की पूछताछ के लिए एक लोहे के कैबनिट हुआ करती थी जिसके अंदर लोहे की किले लगी हुआ करती थी। इसमें अप्रादी को रखा जाता था।

मौत की सजा।

Giloteen

आपने बहुत से बॉलीवुड की मूवीज को देखा होगा जिसमे मौत की सजा देने पर उसको फाँसी लगा दी जाती थी। लेकिन 5-15 शताब्दी में मौत की सजा देने के लिए रेज़र से भी तेज़ एक ब्लेड हुआ करता था। फाँसी देने के लिए बनाये हुए फ्रेम के बीच कैदी का सिर रखकर ऊपर से ब्लेड को छोड़ा जाता था जिससे अप्रादी की गर्दन धड़ से अलग हो जाती थी।

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पिरामिड की तरह दिखने वाली सीट

Piramid

पिरामिड की तरह दिखने वाली सीट पर अपराधी को उसके सेंटर पॉइंट पर बैठाया जाता था। अपराधी के शरीर के अलग अलग हिस्सों को रस्सियों से बाँदा जाया करता था, उसके बाद रस्सियों को हिलाकर अपराधी के प्राइवेट पार्ट्स को जख्मी किया जाता था।

अपराधी को चढ़ाया जाता था सूली पर

Kaidiyon

कांटेदार फ्रेम

frame

टॉर्चर करने का यह तरीका सबसे दर्दनाक था। इस तरीके में अपराधी को लोहे या लकड़ी के बने हुए कांटेदार फ्रेम के बीच में रखा जाता था। इस फ्रेम के अंदर लोहे की कीलें लगी हुए होती थी। इस में न तो अपराधी अपने सिर को हिला सकता था और न ही कुछ खा-पी सकता था।

लोहे की नुकीली पोल

Pole

अपराधी को टॉर्चर करने का यह सबसे दर्नाक तरीका हुआ करता था। इसमें अपराधी को लोहे की एक नुकीली पोल पर कैदी को बैठाया जाता था। ऐसा करने से अपराधी के शरीर में धिरे-धिरे पोल शरीर के अंदर घुस जाता था। इस तरीके को रोमानिया में इस्तेमाल किया जाता था।

लकड़ी के चक्के से बांधकर तोड़ा जाता था हड्डियों को


Chakke

इस तरीके को मौत की सजा देने के लिए किया जाता था। इसमें लकड़ी के बने हुए चक्के से अपराधी को बाँध दिया जाता था। चक्के को घुमाकर अपराधी की हड्डियों को तोड़ा जाता था।

नेकेड बैठाया जाता था लकड़ी के घोड़े पर

Lakdi

5-15 शताब्दी में एक और ऐसी सजा थी जिस सजा को लड़कियों को दी जाती थी। सजा देने का तरीका कुछ इस हुआ करता था जिसमे लड़की को नेकेड करके घोड़े जैसे एक लकड़ी के स्ट्रक्चर पर बैठा दिया जाता और निचे से पैरों में वजन को लटका दिया जाता था। वजन को निचे की और से खींचा जाया करता था। ऐसा करने से अपराधी के शरीर के 2 हिस्से हो जाते थे।

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